
पर्युषण पर्व पर तपस्वियों ने रखे निर्जला 3, 5 और 7 उपवास।
जैन समाज के उपवास कठिन और तपस्या भरे होते हैं जिसमें पूरी तरह उपवास निर्जला होते हैं।

खंडवा। हर त्यौहार नये रूप लेकर आता है और अधिकांश त्यौहारों में अलग-अलग पकवान बनाए जाते हैं। दीपावली पर जहां अलग-अलग पकवान बनाए जाते हैं वहीं रक्षा बंधन पर खीर का महत्व है, होली पर शकर बताशे के साथ पकवान बनाए जाते हैं लेकिन जैन धर्म में पर्युषण पर्व का त्यौहार त्याग और तपस्या के रूप में मनाया जाता है। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि उपाध्याय विश्रुत सागर एवं निर्वेद सागर जी सागर महाराज के सानिध्य में चल रहे पर्युषण पर्व के दौरान जहां सामाजिक बंधु नित्य नियम पूजा के साथ भगवान का अभिषेक, शांतिधारा एवं दस लक्षण धर्म की पूजा कर प्रवचनों का लाभ ले रहे हैं वहीं मुनिसंघ के सानिध्य में समाज के तपस्वी तीन पांच और सात की उपवास की साधना की। पर्युषण पर्व का बुधवार को सातवा दिन था। जिनेंद्र देव एवं मुनिसंघ के आशीर्वाद से तरुण गंगवाल, नमन जैन बीना, अपूर्व ,अर्पण प्रवीण बैनाडा के बुधवार तक सात उपवास हो चुके थे और ये तपस्वी दस उपवास की ओर अग्रसर हैं वही गीतांश, गुलीशा छाबड़ा ,स्वाति भूपेश जैन,अर्पित जैन,अतुल जैन महिमा, दीपिका पहाड़िया द्वारा पांच उपवास एवं दीपक सेठी, नीति हेमंत गोधा द्वारा तीन उपवास की तपस्या की गई। मुनि सेवा समिति के प्रचार मंत्री सुनील जैन प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि जैन समाज में जो उपवास किए जाते हैं वे पूरी तरह निर्जला होते हैं जिसमें जल, अन्न के साथ किसी भी प्रकार की खाद्य सामग्रियों का उपयोग नहीं किया जाता। इसी प्रकार अपनी क्षमता के अनुसार सामाजिक बंधुओं ने दो, तीन पांच सात उपवास भी किए हैं। इन सभी तपस्वियों का सम्मान घासपुरा महावीर जैन मंदिर परिसर में क्षमावाणी पर्व पर मुनिसंघ के सानिध्य में किया जाएगा।
बुधवार को श्री पोरवाड़ दिगम्बर जैन धर्मशाला में आयोजित पूजन मे सौधर्म इंद्र बनने एवं पूजन सामग्री व श्रीफल भेंट करने का सौभाग्य श्रीमति जसवंती कैलाश जैन लोनारा और महाराज जी को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य अरुण कुमार नमन जैन बीना परिवार को प्राप्त हुआ।










